मॉस्कोः इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यह बात खुद रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बताई है। उन्होंने हाल ही में दिए एक बयान में कहा है कि पीएम मोदी जल्द ही रूस आएंगे और यह यात्रा महत्वपूर्ण है। पुतिन ऐसे वक्त में पीएम मोदी के रूस आने का इंतजार कर रहे हैं, जब अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध सुलझाने के लिए भारत को प्रमुख वैश्विक शक्ति बताया था।
ईरान युद्ध से दुनिया में गहराया ऊर्जा संकट
वर्तमान में मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। ईरान भी मिडिल-ईस्ट में इजरायल और अमेरिका के ठिकानों पर ताबड़तोड़ जवाबी हमले कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान ने इजरायल और अमेरिका के सहयोगी देशों के लिए पूरी तरह बंद कर रखा है। इससे तेल कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हैं।
ईरान पर अमेरिका के हमले को रूस ने कहा-आक्रामकता
ईरान के मजबूत समर्थक रूस ने अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई को "आक्रामकता" करार दिया है। लावरोव ने कई बार कहा है कि ईरान आत्मरक्षा में काम कर रहा है, और युद्ध से परमाणु प्रसार का खतरा बढ़ सकता है। रूस ने UNSC में शांति की अपील की है और BRICS स्तर पर चर्चा तेज की है।
भारत सभी पक्षों से रखता है मजबूत संबंध
भारत की स्थिति इस युद्ध में बेहद संतुलित है। पीएम मोदी ने युद्ध शुरू होने के बाद 2 बार ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की है। इस दौरान शांति और सहयोग पर वार्ता करने के साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों के लिए रास्ता आसान करने और भारतीयों की रक्षा पर चर्चा हुई है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने ईरान समेत मिडिल-ईस्ट में "शांति और संवाद" पर जोर दिया है। वहीं भारत के इजरायल के साथ भी मजबूत रक्षा-संबंध हैं। फरवरी के आखिरी हफ्ते में पीएम मोदी की इजरायल यात्रा हुई थी। इस दौरान भारत-इजरायल में कई अहम व्यापारिक और रणनीतिक समझौते हुए। इसके अलावा रूस-भारत पारंपरिक मित्र हैं। भारत ने रूस से S-400 समेत तेल और रक्षा सौदे महत्वपूर्ण हैं। भारत रूसी तेल का बड़ा खरीदार बना हुआ है। वहीं अमेरिका के साथ भी भारत के रणनीतिक और व्यापारिक व रक्षा संबंध हैं।
पुतिन को क्यों है पीएम मोदी का इंतजार
रूसी राष्ट्रपति पुतिन को मोदी का इंतजार कई वजहों से हो सकता है। पहला वैश्विक हालात को देखते हुए भारत-रूस की रणनीतिक और व्यापारिक समाझेदारी और और अधिक मजबूत करना, दूसरा इस वैश्विक संकट में भारत की भूमिका निर्णायक रूस में देखना है। भारत इसमें BRICS (जिसमें भारत, रूस, चीन, ईरान शामिल) के माध्यम से मध्यस्थता कर सकता है। मोदी की रूस यात्रा से पुतिन को उम्मीद है कि भारत अमेरिका पर दबाव डालेगा या वैकल्पिक डिप्लोमैटिक रास्ता सुझाएगा। लावरोव के बयान से लगता है कि रूस में शायद BRICS समिट या द्विपक्षीय बैठक के लिए पीएम मोदी की यात्रा को लेकर तैयारियां चल रही हैं। यह यात्रा भारत की "मल्टी-एलाइनमेंट" नीति को मजबूत करेगी, जहां वह अमेरिका, रूस और इजरायल के साथ संतुलन बनाए रखता है। पुतिन के लिए मोदी की मौजूदगी से रूस को वैश्विक स्तर पर समर्थन मिल सकता है, खासकर जब ट्रंप प्रशासन ईरान पर सख्त है। दुनिया इस मुलाकात पर नजरें गड़ाए है।